Wednesday, August 7, 2013

achanak laga ki ye andhera ek UuRJA hai..............

ज़िन्दगी में कभी कभी आप अपने आप को बिलकुल अँधेरे में महसूस करते है , एक घना गहरा अँधेरा और तब सारी  उम्मीदें मर जाती है और ऐसा  लगता है जिसके बाद अब कभी सुबह नहीं होगी।

मुझे भी ऐसा ही महसूस होता था मगर अचानक लगा की ये अँधेरा ऐसी उर्जा है जिसमे अनगिनत किरने कैद है। क्यूंकि जब आप अपने आस पास इतना अँधेरा महसूस करते है तो आपकी सारी अन्य इन्द्रियां काम करने लगती है , ऐसे समय में मुझे सब कुछ आसान लगता है क्यूंकि तब उसमे गलत होने की कोई गुंजाईश ही नहीं होती है। काले पर और कौन रंग चढ़ेगा, और फिर जब मैं इस अँधेरे में कुछ वक़्त गुज़ार लेती हु तो मुझे सब कुछ साफ़ दिखने लगता है।

उर्जा से मिलती है शक्ति और फिर इंतज़ार होता है समय की घड़ियों के अपनी जगह से सरकने का। मैं  अक्सर सोचती हूँ  की हर पल कैसे जिया जा सकता है दुखों  के साथ, हर पल एक नई मुसीबत और फिर कोई हल नहीं। मगर अगर इसी अँधेरे में घुल जायेगा आपका दिमाग, तो आते है  नये विचार और फिर से शुरू होता है नया सफ़र , वही पुराना सफ़र मगर नयी शुरुआत के साथ। मगर कुछ समय के लिए क्यूंकि फिर से यही काले अँधेरे की उर्जा लौट के आती है।

मैं इसे ज़िन्दगी की मजबूरी कहती हूँ , वक़्त कहती हूँ , स्वाद कहती हूँ , रंग कहती हूँ , मौसम  कहती हूँ।

Wednesday, April 24, 2013

"WHY THEY DO SO"

Arushi Murder Case

Arushi and Hemraj were murderd in May 2008 and from then court procedure was going on in which her own parents are found guilty.
Its shocking as well as awful to think that parents killed their own child but a question is raise here that "WHY THEY DO SO" ...precisely they get punishment and from here another side of the mirror turns around..

A MArk!!! The punishment is for What they have Done OR The Way They Have Done ?
Arushi Was murdered because her parents love her,,,,,, no doubt they give her all comforts but one huge mistake of that girl and that servant took their and her parents life too.

                                                                              It is to think that Is this a case of cold blooded murder ? or A case of the parents who cannot control themselves seeing their daughter making joke of their love and affection ?

sometimes u miss,,,,,,,,,,,,

हमने अगर मुहब्बत के चेहरे से पर्दा उतारा न होता, तो वो झूठ जो कभी हमारा आशियाँ था ,
आज भी वो हमारा होता।।
बेख़ौफ़ चलते रहते  हर राह पे हम, अगर एक दिन यूँ सच का नज़ारा न होता।
कितने मशगूल थे हम खिलखिलाने में, की जिनके साथ रोने का भी सहारा न होता ,,,,,
कागज़ की कश्ती थी ये जिंदगानी जो डूब ही जानी थी ,,,,,,,,,,अगर इस जहाँ में कोई हमारा ना  होता।।।।।।




Sunday, April 21, 2013

this world is the real "DEATHLY HALLOW"

Sometimes it is very difficult to know that what this world wants with me or what i want from myself. 
i'll keep thinking although it is very difficult to have all the answers from own self,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,How much balanced this world is or from the other sight so much dis balanced.

This is very awkward but true that in this world ,,everything has a COST. whenever you want to be happy you have to pay your loving thing. And again you become sad,, this world is the real     "DEATHLY HALLOW"
Whatever we say, but in reality we hate one another,, love and affection is like pure business and i m also a part of that drama.. so cruel but true.            I always want to run from myself and every time i feel myself trapped which make me learn that we all here to suffer, and become happy is like a day dream..

Sometimes i scared, want to go out of this world,. trying to breath,,,,,and adjusting with the reality that 
' Happiness Cost SOOO Much In This Great World '.

Thursday, March 21, 2013

rango ka tyhaar hai ye ,,,,,,

होली का त्यौहार फिर से आ  गया, ढेर सारे चटकीले रंग मगर अब हम और हमारा समाज इन रंगों की चमक और मिठाई की मिठास से बहुत आगे निकल चुका है। एक तरह से देखा जाये तो अब हम इतने ज्यादा विकसित हो चुके है की हमें होलिका दहन में बुराइयों  का अंत नहीं  बल्कि नफरत की आग नज़र आती है। एक दुसरे से गले मिलकर शिकवे मिटने की जगह ,गले लग कर छुरा भोकने में बदल गई है। खून का रंग सब रंगों से ज्यादा भारी हो गया है जिसमे की हर कोई अपने हाथ रंग लेना चाहता है। 
कुछ समझने की कोशिश में सब आपस में उलझ जाता है,  इसी उलझन में हम और हमारा जीवन ख़त्म होता जा रहा है . जो त्यौहार हमें एक करने के लिए बने है उन्ही से कोई सीख लेकर क्यों नहीं जीना सीखते है हम।
शायद इसी को डेवलपमेंट कहते है जब दिमाग जमीनी बातों को समझना छोड़ देता है और भ्रष्टाचार, आतंक , और लचर सोच का हो जाता है।
आज हम ऐसी जगह पर रह रहे है जहा कोई भी कभी भी किसी को सरे आम मार सकता है, उसका खून तक कर सकता है, घर से निकलते समय लौटने का पता नहीं क्युकी कही पर भी बम हो सकता है, या फिर घर के अन्दर से लेकर बहार तक इस संसार को जन्म देने वाली स्त्री इतनी असुरक्षित है की वो किसी पर भरोसा नहीं कर सकती।
आखिर किस जगह खड़े है हम और इस तरह कब तक जी पाएंगे इसका जवाब ढूढना होगा, हमें ये सब बदलना होगा वरना होली का रंग फीका पड़ जायेगा और नफरत का रंग हमारे जीवन को खून से लाल कर देगा।

Thursday, March 14, 2013

hey ishwar hame maaf kare ,,,hum apraadhi hai

विनाश के देव शिव शंकर को इस महाशिवरात्रि पर मेरा प्रणाम और सभी को बहुत बहुत शुभकामनायें
मैंने अपने जीवन के इतने सालों में कभी भी स्वयं को भक्ति में बहुत लीन महसूस नहीं किया परन्तु मन में हमेशा ये जिज्ञासा रही है की इश्वर के बनाये इस संसार को समझ सकू, की आखिर इतनी बड़ी व्यवस्था चलती किस तरह से है. सिर्फ मेरे ही मन में नहीं परन्तु मुझे ऐसा लगता है की सभी के मान में ये बात जरुर आती है की इस संसार के जीवन चक्र में इतने कष्ट क्यों है ? अगर इश्वर हमारा पिता है तो वो अपने बच्चो को इतने कष्ट में कैसे देख सकता है ? जीवन भर उसकी पूजा करने वाले इतना दुःख क्यों उठाते है ? और व्यभिचारी तथा दुराचारी हमेशा धन संपन्न क्यों होते है ? उन्हें दंड क्यों नहीं मिलता है ?
सोचें तो यह कितना अजीब है मगर सत्य भी , की यह पता ही नही की सही कर रहे है तो परिणाम भी अच्छा  ही होगा। शायद यही वजह है की व्यक्ति निडर होता जा रहा है और लगातार गलत काम करता जा रहा है। ऐसे में इश्वर क्यों नहीं  धरती पर आता है और अपने बच्चो को सदाचार का पाठ पढ़ता है। जैसे हर माता  पिता अपनी संतान को गलत सही के विषय में बताते है उसी प्रकार से वो भी क्यों नहीं आता है .
मगर शायद वो हमसे रूठ गया  है क्यूंकि उसने हमें इतनी खूबसूरत जगह दी रहने के लिए और हमने उसे छिन्न - भिन्न कर दिया और ये उसका अधिकार है की वो हमसे नाराज रहे और तब तक नाराज़ रहे जब तक हम फिर से इस धरती को उसके निवास के लिए सुन्दर न बना दे.
तब हमें अपने सवालों के जवाब स्वयं मिल जायेंगे और हमारा जीवन पवित्र हो जायेगा।
" हे इश्वर हमें माफ़  करें , हम  अपराधी है। हमसे बहुत बड़ी गलती हुई है और अपनी इस गलती को सुधरने के लिए हम हर प्रयत्न करेंगे। और आपको प्रसन्न करेंगे। हमें इतनी शक्ति दे की हम अपनों आप को बदल सकें, और आपका आशीर्वाद प्राप्त कर सकें"
अगर अपने इस जीवन में इस वादे का एक  भाग भी हम पूरा कर सके तो भगवान् हमें जरुर माफ़ करेगा।
      

Saturday, February 23, 2013

bhagwan se direct contact hai ,,,,,,

प्रवचन एक ऐसा शब्द है जिसका आस्था  से बहुत गहरा सम्बन्ध है, उसी तरह जैसे आस्था से भक्त का और भक्त से इश्वर का। महाकुम्भ में मैं  एक दिन टहलते हुए मनुष्य के विभिन्न रंगों को देख रही थी की अचानक मेरी नज़र एक पोस्टर पे आकर अटक गई . पोस्टर एक बाबा जी का था और बाबा जी की उम्र होगी कोई 3 5 से 4 0 के बीच। मैंने सोचा की इन्हें  इस उम्रे में  बाबा जी या संत बनने की क्या जरुरत पड़ गयी और फिर इस उम्र में इतना ज्ञान कहा से आ गया की दुनिया इन्हें पूज रही है। अक्सर दादी को टी .वी . ऐसे ही महापुरुषों को सुनते देखते थे, सोचा चलो इनकी कम से कम शक्ल अच्छी है इसी बहाने सुन के देखते है की आखिर ये प्रवचन होता क्या  है?
मैं पंडाल में जाके बैठ गई, पंडाल भी आलीशान मतलब महंगा।  बाबा जी की गद्दी बड़ी ऊची ,सोचा जरुर बाबा जी भी बहुत ज्ञानी है। थोड़ी देर बाद पंडाल भर गया मगर बाबा जी नदारद, समझ में आया बाबा जी माहौल बना रहे है। आखिर बड़े बाबा जी है, यही सोच के मैं कुछ देर के लिए बाहर आ गई। 
" देखती क्या हू !!! बाबा जी फ़ोर्चूनर से आ रहे है और फिर धीमे से उनकी बड़ी महंगी गाड़ी पंडाल के पीछे गुम हो जाती है और गेट बंद हो जाता है.
मैं अश्चर्य चकित सी बाहर खड़ी सोचती हू " इतना पैसा एक संत के पास और हर संत के पास। ये प्रवचन है या प्रवचन का धंधा।" --- थोड़ी देर बाद प्रवचन शुरू होता है तो फिर वही नज़ारा, गरीब नासमझ लोगो से पूरा पंडाल भरा था। जिन्हें शायद ही बाबा जी की बात में कोई दिलचस्पी हो या फिर बाबा जी की वही पुरानी  घिसी पीटी  लेकिन ठीक  ठाक  बात को अपने जीवन में उतरने का कोई मन। 
सामने वही उपदेश चल रहा था जिसे हम अपने जन्म से लेकर मरने तक हजारों बार सुनते हैं मगर सिर्फ उन उपदेशो से ये संत करोड़ो  कम लेते हो ये बात गले नहीं उतरती। असल चेहरा तो कुछ और है या फिर यूँ  कहे की शायद सबसे ज्यादा इन्ही लोगों को पता है की इश्वर के नाम का सही जगह पर और सही समय पर उपयोग  कैसे किया जाता है ?  गद्दी पर बैठे तो संत हो गए, और फिर देश की सत्ता को तय करने लगे तो राजनीतिज्ञ हो गए। और उसी से आता है ये करोड़ो रूपया, और हम जैसे मूर्ख लोग सोचते है की भगवान से बाबा जी का डायरेक्ट कांटेक्ट है।